महालक्ष्मी का पीठस्थान कोल्हापुर या दक्षिण काशी में वे भिक्षा ग्रहण करते हैं और पांचालपुर में उस भिक्षाअन्न का भोजन करते हैं । विट्ठल पुर में यानी चंद्रभागा के किनारे बसे पंढरपुर में (जिला सोलापुर )में ये तिलक धारण करते हैं । भीमा और अमरजा नदी के संगम स्थल गाणगापुर में योग साधना करते हैं । कुरुक्षेत्र के स्यमन्तक तीर्थ में आचमन करते हैं । इस तरह यद्यपि भगवान दत्तात्रेय प्रतिदिन लीला के व्याज से भिन्न भिन्न स्थानों में संचार करते रहते हैं , फिर भी उनका स्मरण करने वाले भक्तों के लिए वे अत्यंत निकट हैं । इससे मालूम पड़ता है कि प्रतिदिन सूर्योदय से दूसरे दिन सूर्योदय तक किसी न किसी कर्म के बहाने से सम्पूर्ण भारत की परिक्रमा करते रहते हैं । इसमें आश्चर्य की कोई बात नहीं है ,कारण सिद्ध देह में देश और काल का व्यवधान गति का बाधक नहीं होता ।
हिंदी साहित्य ।।
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*"महत्वपूर्ण कथन"*
▪ तुलसीदास को हिंदी का धर्मध्वज किसने कहा है?-
उत्तर::::——-चतुरसेन शास्त्री
▪ नाथों की भाषा को फक्कडी भाषा किसने कहा है?
उत्तर:::::——–चत...
4 weeks ago

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