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श्रीराम के सोलह गुण जो हमें सीखने चाहिए ।।



▪️प्रियदर्शन (खूबसूरत)

▪️गुणवान (ज्ञानी व हुनरमंद)

▪️कांतिमान (अच्छा व्यक्तित्व)

▪️दृढ़प्रतिज्ञ (मजबूत हौंसले वाला)

▪️सदाचारी (अच्छा व्यवहार, विचार)

▪️सभी प्राणियों का रक्षक (मददगार)

▪️सत्य (सच बोलने वाला, ईमानदार)

▪️विद्वान (बुद्धिमान और विवेक शील)

▪️क्रोध जीतने वाला (शांत और सहज)

▪️कृतज्ञ (विनम्रता और अपनत्व से भरा)

▪️मन पर अधिकार रखने वाला (धैर्यवान)

▪️वीर्यवान (स्वस्थ्य, संयमी और हष्ट-पुष्ट)

▪️सामथ्र्यशाली (भरोसा, समर्थन पाने वाला)

▪️धर्मज्ञ (धर्म के साथ प्रेम, मदद करने वाला)

▪️किसी की निंदा न करने वाला (सकारात्मक)

▪️युद्ध में जिसके क्रोधित होने पर देवता भी डरें 
(जागरूक, जोशीला, गलत बातों का विरोधी)

अच्छी-अच्छी बातें 
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स्त्रियों को पति की आज्ञा में रहकर ही पूजा करनी चाहिए ऐसा शास्त्रों ने कहा है। तो अगर पति मना करे तो स्त्रियों का क्या कर्तव्य है?

शङ्का# :--स्त्रियों का परम ब्रत (धर्म) पति की सेवा है। अतः जिनसे पति की सेवा में बाधा होती हो उन्ही व्रत तप आदि को ही पतन कारक समझना चाहिए। जिनसे पतिसेवा रूप महाब्रत में बाधा न हो, तथा पति द्वारा अनुमोदित हों, वैसे जप आदि पतन के कारक नहीं होते, वल्कि उत्थान कारक ही होते हैं। जैसे कि ---
       #भर्तुश्छन्देन_नारीणां_तपो_वा_व्रततकानि_वा।
   #निष्फलं_खलु_यद्भर्तुरच्छन्देन_क्रियेत_हि।।(हरिवंश.पु.विष्णु

प..६६--५४)---पति की अनुज्ञा से नारी को तप व्रत आदि करना चाहिए। पति की अनुज्ञा(सम्मति) के विना ही जो विरोध करके करतीं हैं वह सब निष्फल होता है।।" इस प्रकार कहा गया है।
        
यहाँ यह बात विशेष रूपसे ध्यातव्य है कि--जो स्त्रियां पति की इच्छा के विरुद्ध नहीं हैं, किन्तु उनके #स्पष्ट_मना_करने_पर_भी उन्हें अर्थसंकट में डालकर भी शृङ्गार के चटकीले भड़कीले कीमती वस्त्राभूषण आदि ख़रीदतीं हैं, कामुक tv सिनेमा आदि देखतीं हैं, कामोद्दीपक अण्डा मद्य मांसादि खातीं हैं, परपुरुष से भी अनावश्यक गुह्यभाषण करतीं हैं , हरिदर्शन, हरिकीर्तन, भगवत्प्रसाद नहीं ग्रहण करतीं ,और कारण बतातीं हैं कि #मेरे_पतिदेव_मना_करते_हैं, ऐसी स्त्रियों का पतन ही नहीं #घोर_पतन होता है।

#समाधान 

पति की सेवा में बाधा न हो, फिर भी यदि पति नास्तिकता के कारण अश्रद्धा या दुष्टता के कारण पत्नी को जपादि करने को मना करता हो तो उसकी आज्ञा का अतिक्रमण करके गोपियों की तरह व्रत देवाराधन जप आदि करने पर स्त्रियों का पतन कदापि नहीं होता, #उत्थान ही होता है।
        
जपादि का निषेध उसी स्थिति में है कि पत्नी को पति के अनुकूल होकर ही घरमें भगवान् की सेवा पूजा करनी चाहिए। यदि पति अहङ्कार में मना करे तो उल्लंघन करे लेकिन यदि पति अनुकूल हो तो आज्ञा लेकर ही सेवा करनी चाहिए। यही शिष्टाचार है। 

     पति की ही भाँति सास ससुर माता पिता गुरु, आदि की यथायोग्य लोगों के आशीर्वाद और आज्ञा लेकर ही छोटो को सेवा पूजा करनी चाहिए। बड़ो की और सन्तों की आज्ञा में रहकर वर्तन करना ही शास्त्र की मर्यादा है और इसी से भगवान् प्रसन्न होते हैं।

 यदि बड़े भी नास्तिकता वश जप भजन आदि की आज्ञा न दें, तो उनकी भी आज्ञा का पालन न करने से भी कोई दोष नहीं होता। 

लेकिन बड़े होने के नाते उनकी आज्ञा एक बार लेनी चाहिए, न मानें तो साम दाम लगाकर प्रयास करना चाहिए। जब कोई उपाय न हो तो स्वयम् आज्ञा का उल्लंघन करें।।

इसीलिए गोस्वामी जी ने कहा है ---
   #जाके प्रिय न राम वैदेही।
ताजिय ताहि कोटि वैरी सम यद्यपि परम सनेही।
बलि गुरु त्यजेउ कन्त ब्रज वनितन्हि भये जग मंगल कारी।(विनय .१७४)।। 
सो सब करम धरम जरि जाऊ।।....

- आचार्य मण्डन मिश्र का लेख (थोडा मेरे द्वारा परिष्कृत)

सेहत मंत्र.......

1. फ्रिज का अत्यधिक ठंडा पानी पीने से बड़ी आँत सिकुड़ जाती है।

2. गर्म पानी से नहाने से शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता क्षीण होती है।

3. खड़े होकर मूत्रत्याग करने से रीढ़ की हड्डी कमजोर होती है।

4. चैत्र माह में नीम के पत्ते खाने से रक्त शुद्ध होता है।

5. अनार आँव, संग्रहणी, पुरानी खाँसी व हृदयरोगों के लिए सर्वश्रेष्ठ औषधि है।

6. चोकर खाने से शरीर की रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ती है।

7. जल जाने पर आलू का रस, हल्दी, शहद या घृतकुमारी में से कुछ भी लगाने पर जलन ठीक हो जाती है और फफोले भी नहीं पड़ते।

8. पैर के अँगूठों के नाखूनों को सरसों के तेल से भिगोने से आँखों की खुजली, लाली और जलन ठीक हो जाती है।

9. चोट, सूजन, दर्द, घाव या फोड़ा होने पर उस पर 5 - 20 मिनट तक चुम्बक रखने से जल्दी ठीक होता है। हड्डी टूटने पर चुम्बक का प्रयोग करने से आधे से भी कम समय में चोट ठीक हो जाती है।

10. प्रातः का भोजन राजकुमार के समान, दोपहर का राजा और रात्रि का भिखारी के समान करना चाहिए।

11. गेहूँ के दाने के बराबर चूना गन्ने के रस में मिलाकर पिलाने से पीलिया बहुत जल्दी ठीक हो जाता है।

12. जीरा पेट दर्द में बहुत लाभदायक है। जीरे को तवे पर भून लें। 2-3 ग्राम की मात्रा गरम पानी के साथ दिन में 3-4 बार लें या वैसे ही चबाकर खायें, शीघ्र लाभ प्राप्त होता है।

13. जोर लगाकर छींकने से कानों को क्षति पहुँचती है।

14. अधिक झुककर पुस्तक पढ़ने से फेफड़ों को हानि पहुँचती है एवं टीबी होने का भय रहता है।

15. तुलसी के नित्य सेवन से कभी मलेरिया नहीं होता।

16. हृदय रोगियों के लिए अर्जुन की छाल, लौकी का रस, तुलसी, पुदीना, मौसम्मी, सेंधानमक, गुड़, चोकरयुक्त आटा और छिलकेयुक्त अनाज औषधियाँ हैं।

17. भोजन के पश्चात् पान, गुड़ या सौंफ खाने से पाचन अच्छा होता है।

18. मुँह से साँस लेने से आयु कम होती है।

19. भोजन पकाने के बाद उसमें नमक डालने से ब्लड प्रेशर बढ़ता है।

20. दूध के साथ नमक या नमकीन पदार्थ खाने से विभिन्नप्रकार के चर्मरोग होते हैं।

21. मुलेहटी चूसने से कफ बाहर आ जाता है और आवाज मधुर हो जाती है।

22. नीबू का सेवन गन्दा पानी पीने से होने वाले विभिन्न रोगों से बचाता है।

23. खाने के लिए सेन्धानमक सर्वश्रेष्ठ होता है। उसके बाद काले नमक का स्थान आता है। सफेद नमक जहर के समान होता है।