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पुरुषों को कैसे कपड़े पहनने चाहिए?

पुरुषों को भी शास्त्रीय वस्त्र धारण करने चाहिए, इससे उनके भीतर शालीनता आदि गुण बढ़ेंगे। स्त्रियों ने तो आज भी वस्त्रों की मर्यादा बहुत बचा रखी है, पर पुरुषों ने तो शास्त्रीय वस्त्रों को सर्वथा ही भुला दिया है। आज भी हर समय साड़ी पहनने वाली कई स्त्रियाँ मिल जाएंगी, परंतु एक समय भी धोती–अंगवस्त्र पहनने वाले पुरुष न के बराबर।

इसलिए आइए जानते हैं कि पुरुषों को धार्मिक कार्यों में किस प्रकार के वस्त्र धारण करने चाहिए।


आवश्यक वस्त्र
• सभी पुरुषों के पास धोती और उपवस्त्र/अंगवस्त्रम/उत्तरीय (केवल कॉटन/सिल्क/जूट) के कम से कम 3 सेट तो होने ही चाहिए।
• इनमें से दो तो दैनिक नित्यकर्मों के लिए प्रयोग करें तथा एक आपात स्थिति के लिए रख लें।


दैनिक प्रयोग की प्रक्रिया
1. सुबह संध्योपासना / पूजन करने के लिए एक सेट का प्रयोग करें (धोती–अंगवस्त्र)।
2. एक सेट को संध्या समय पुनः संध्योपासना/पूजन में प्रयोग करें।
3. संध्या/पूजन पूरा करने के बाद उन्हें धो लें और सूखने डाल दें (चाहें तो अगले दिन सुबह धो लें)।
4. अगले दिन कपड़ों के दूसरे सेट का उपयोग करें।
5. इसी प्रक्रिया को नित्य दोहराएं।

नोट: बिना धुला वस्त्र धारण न करें, क्योंकि यह निषिद्ध है।


शास्त्रीय प्रमाण
• श्री विष्णु स्मृति 64 – “नाप्रक्षालितं पूर्वधृतं वसनं विभृयात् ।”
अर्थात् : पहले के पहने हुए वस्त्र को बिना धोए पुनः नहीं पहनना चाहिए।
• विधान परिजात – एक दिन के उपयोग के बाद बिना धुले रहने वाले कपड़े देव और पितृ कर्मों में धारण करने योग्य नहीं रहते।


ऊनी व रेशमी वस्त्रों की छूट
• ऊनी और रेशमी वस्त्र धारण करने से लेकर सातवें दिन शुद्ध रहते हैं।
• सातवें दिन शाम अथवा आठवें दिन सुबह उन्हें धो लें।


गीले वस्त्र का समाधान
• गीले वस्त्र धारण करना शास्त्र ने वर्जित किया है।
• परंतु पौष, माघ आदि में वस्त्र सूख नहीं पाते तो उपाय यह है कि
• भीगे कपड़े को सात बार हवा के विपरीत झाड़ 
दिया जाए तो उसको सूखा माना जाता है।
आपत स्थिति में ऐसा कर लेना चाहिए।


वस्त्रों के रंग
• शुभ रंग: सफेद और पीले वस्त्र।
• वर्जित रंग: नीला, लाल (अधिक), काला।
• अपवाद: नीला वस्त्र यदि शुद्ध रेशम का हो तो धारण योग्य।
• वराह पुराण: श्रीहरि के पूजन में लाल, नीले तथा काले रंग के वस्त्र धारण नहीं करने चाहिए (चाहे सूती हों या रेशमी)।
• गणेश जी, देवी जी तथा सूर्यदेव की उपासना में रक्त वस्त्र प्रशस्त है।
• किंतु श्वेत वस्त्र धारण कर भी इनकी उपासना का विधान है।
• केसरिया श्रेणी के रंग – वर्जित हैं। उनका विधान मुख्यता केवल सन्यासियों के लिए है, साधारण जनों के लिए नहीं।


धोती और अंगवस्त्र का विधान
• धोती हमेशा तीन लांग लगाकर ही धारण करें।
• धार्मिक कृत्य करते समय बाएँ कंधे को सदैव अंगवस्त्र से ढंके।
• अंगवस्त्र को बाएँ कंधे से अलग न करें।
• वाधूल स्मृति: धार्मिक कृत्यों में कभी गले में वस्त्र न लपेटें।
• धोती को सदैव नाभि के बराबर या नाभि से कुछ नीचे ही बाँधें, नाभि के ऊपर न बाँधें।


इस प्रकार हर सनातनी पुरुष को चाहिए की वो स्त्रियों को वस्त्र उपदेश देने से पहले स्वयं अपने वस्त्र आचरण को ठीक करने की दिशा में थोड़ा ही सही काम करना शुरू करे।

नारायण 🙏🏻

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